एक दिन
बस एक दिन
कभी कुछ अलग करते हैं
अभी कुछ अलग करते हैं
आज कुछ ऐसा नहीं, कुछ वैसा करते हैं
अब सवाल ये है , कि क्या,
क्या कुछ नया करते हैं ?
तो नया ये है कि,
आज अपने लिए नहीं,
आपके लिए कुछ करते हैं
क्या कुछ नया करते हैं ?
तो नया ये है कि,
आज अपने लिए नहीं,
आपके लिए कुछ करते हैं
हर दिन तो यही सोचा कि आज क्या हो रहा है
हर दिन सोचा यही कि कल आखिर होगा क्या
क्यूं न आज ये सोचे कि
उसके क्या हाल है
उसके क्या ख्याल है
हर दिन सोचा यही कि कल आखिर होगा क्या
क्यूं न आज ये सोचे कि
उसके क्या हाल है
उसके क्या ख्याल है
क्यूं न आज उसके ख्वाब पूरे करे,
अपनों के नहीं, आज उसके सवाल पूरे करे
क्यूं है वो खफ़ा मुझसे
क्यूं नहीं वो चाहता मुझे
अजनबी से है हम तुम
अपनों के नहीं, आज उसके सवाल पूरे करे
क्यूं है वो खफ़ा मुझसे
क्यूं नहीं वो चाहता मुझे
अजनबी से है हम तुम
क्यूं नहीं कभी समझ आता ये मुझे
सोचो, अगर सोच सको तो सोचो
हमारी बातों का सख्श नहीं है अंजान अगर
तो बगल मे बैठा इंसान भी तो इंसान है
वो अगर अंजान है
तो हमारी साँस क्यू एक समान है
हमारी बातों का सख्श नहीं है अंजान अगर
तो बगल मे बैठा इंसान भी तो इंसान है
वो अगर अंजान है
तो हमारी साँस क्यू एक समान है
गर नहीं है वो अजनबी अब
तो चलो,
आज उसके लिए कुछ करते है
आज खुद के लिए नहीं
सबके लिए कुछ ना कुछ करते हैं
तो चलो,
आज उसके लिए कुछ करते है
आज खुद के लिए नहीं
सबके लिए कुछ ना कुछ करते हैं
ये एक दिन होगा ख़ास ना ही सिर्फ मेरे लिए
होगा ख़ास मेरे जीवन के लिए
मेरे देश के लिए
इंसान के लिए
और हमारे अपनों के लिए
होगा ख़ास मेरे जीवन के लिए
मेरे देश के लिए
इंसान के लिए
और हमारे अपनों के लिए
सोचो... एक दिन ...
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